पूर्वांचल में सोलर लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester) और केमिकल अर्थिंग क्यों जरूरी है?

आकाशीय बिजली और हाई-वोल्टेज सर्ज से सोलर प्लांट को बचाएं। 3-पिट केमिकल अर्थिंग, ESE अरेस्टर और SPD बॉक्स की तकनीकी जानकारी।

पूर्वांचल में सोलर लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrester) और केमिकल अर्थिंग क्यों जरूरी है?

1. पूर्वी यूपी में आकाशीय बिजली का खतरा

पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून और मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं काफी होती हैं। चूंकि सोलर पैनल छत के सबसे ऊंचे हिस्से पर लगे होते हैं, इसलिए सही अर्थिंग न होने पर लाखों का इन्वर्टर और घर के टीवी, एसी जल सकते हैं।

2. सुरक्षित सोलर प्लांट के 3 स्तंभ

  1. ESE (Early Streamer Emission) लाइटनिंग अरेस्टर:

    यह छत पर सबसे ऊपर एक छड़ के रूप में लगाया जाता है। यह 50 से 100 मीटर के दायरे में गिरने वाली आकाशीय बिजली को आकर्षित करके सुरक्षित रूप से जमीन में भेज देता है।

  2. 3-पिट केमिकल कॉपर अर्थिंग (Chemical Earthing):

    • पिट 1 (DC Earthing): सोलर पैनल्स के लोहे के ढांचे से जुड़ा।

    • पिट 2 (Inverter Earthing): इन्वर्टर की बॉडी और न्यूट्रल से जुड़ा।

    • पिट 3 (LA Earthing): केवल लाइटनिंग अरेस्टर के लिए समर्पित।

  3. सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (SPD):

    ACDB और DCDB बक्सों में लगे स्प्रेसर ग्रिड से आने वाले हाई-वोल्टेज झटकों को अवशोषित कर लेते हैं।